शुक्रवार, मई 28, 2021

वैक्सीन पॉलिसी पर हाईकोर्ट ने पूछा सवाल विदेशों से टीके राज्य क्यों जुटाएं, केंद्र क्यों नहीं?

 

राज्यों द्वारा वैक्सीन के लिए ग्लोबल टेंडर जारी किए जाने के नतीजों को लेकर मप्र उच्च न्यायालय ने चिंता जताते हुए केंद्र सरकार को सलाह दी कि टीकाकरण नीति पर दोबारा विचार करना चाहिए। मई के महीने में मध्य प्रदेश को जितनी संख्या में वैक्सीन डोज़ दिए जाने का वादा किया गया था, उससे आधे भी नहीं मिल सके। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने इस बारे में केंद्र सरकार से पूछा है कि राज्यों में ज़्यादा से ज़्यादा यूनिटें लगाकर लोकल स्तर पर ज़रूरी लाइसेंस देकर वैक्सीन उत्पादन क्यों नहीं बढ़ाया जा रहा? क्यों राज्य को ज़रूरत के मुताबिक वैक्सीन डोज़ मुहैया कराने की जिम्मेदारी केंद्र नहीं ले रहा? सिर्फ इतना ही नहीं, न्यायालय ने इस पर गंभीरता से विचार करते हुए केंद्र को टीकाकरण पॉलिसी पर फिर विचार करने की बात भी कही।
चीफ जस्टिस मोहम्मद रफीक और जस्टिस अतुल श्रीधरन की युगलपीठ ने यह भी कहा कि देश के बाहर से वैक्सीन जुटाने की इजाजत राज्यों को देने की बजाए स्वयं केंद्र को यह बीड़ा उठाने के विषय में विचार करना चाहिए। न्यायालय ने राज्यों के ग्लोबल टेंडरों की प्रैक्टिस को लेकर भी चिंता ज़ाहिर की।
ग्लोबल टेंडरो से नहीं मिले पॉज़िटिव नतीजे
मध्य प्रदेश सरकार की ओर से न्यायालय को बताय गया था चूंकि लोकल निर्माता वैक्सीन डोज सप्लाई नहीं कर सके इसलिए ग्लोबल टेंडर जारी कर 1 करोड़ वैक्सीन डोज जुटाने की कोशिश की गई। इस पर वकील सिद्धार्थ गुप्ता ने कहा कि करीब 7.3 करोड़ की वयस्क आबादी के लिए इतने डोज काफी नहीं होंगे। वहीं, न्याय मित्र नमन नागरथ ने भी कहा कि कई राज्यों ने इस तरह के ग्लोबल टेंडर जारी किए लेकिन पॉजिटिव नतीजे नहीं मिले। इस बात को दोहराते हुए न्यायालय ने कहा कि पॉजिटिव संकेत न मिलने के बाद इस बात को लेकर चिंताजनक अंदेशे पैदा हो गए हैं कि इस तरह की प्रैक्टिस के चलते आने वाले महीनों में राज्य के पास जरूरत के मुताबिक पर्याप्त डोज आखिर कैसे होंगे।
केंद्र फिर नीति पर विचार करे
न्यायालय ने यह चिंता भी जताई कि वैक्सीन की कमी के हालात में जनवरी 2022 तक देश भर को टीका दिए जाने का लक्ष्य कैसे हासिल किया जा सकेगा। कोर्ट ने कहा हमारी राय में, केंद्र सरकार को अपनी वैक्सीनेशन नीति के प्रभाव को लेकर दोबारा विचार करना चाहिए। देश के इतिहास में अब तक जितने भी व्यापक टीकाकरण कार्यक्रम चले हैं, वो सब केंद्र सरकार ही प्रायोजित करती रही है।

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